रक्षा की तैयारी या मुस्तैदी के तौर पर आईडीएफ एक छोटी स्थायी सेना तैनात करती है, जो पूर्व चेतावनी क्षमता से युक्त होती है। इसके अलावा नियमित वायुसेना और नौसेना भी होती हैं। इसके ज्यादातर सैनिक रिजर्व रखे जाते हैं, जो नियमित रूप से ट्रेनिंग और सर्विस के लिए बुलाए जाते हैं और युद्ध व संकट की घड़ी में अपनी यूनिट्स में शामिल हो जाते हैं।
आईडीएफ की तीनों शाखाएं (थलसेना, वायुसेना और नौसेना) एक एकीकृत कमांड के तहत काम करती हैं। चीफ ऑफ जनरल स्टाफ इसका अध्यक्ष होता है, जो लेटिनेंट जनरल के रैंक का होता है और रक्षा मंत्री के प्रति जवाबदेह होता है। चीफ ऑफ जनरल स्टाफ की नियुक्ति प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री की सिफारिश पर सरकार करती है। इसका कार्यकाल तीन साल के लिए होता, जो प्रायः एक साल के लिए बढ़ा दिया जाता है। आईडीएफ में सभी पदों पर स्त्री और पुरुष सैनिक कंधे से कंधा मिलाकर अपनी सेवाएं देते हैं। इनमें टेक्नीशियन, संचार और इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट, युद्ध प्रशिक्षक, कार्टोग्राफर, प्रशासनिक, आयुध कर्मचारी, कम्प्यूटर ऑपरेटर, डॉक्टर, वकील और अन्य तरह के लोग होते हैं। अब कॉम्बैट यूनिट में भी ज्यादा से ज्यादा महिलाएं शामिल हो रही हैं।


