राष्ट्रपति का चुनाव संसद सामान्य बहुमत के आधार पर करती है। निजी व्यक्तित्व और देश के प्रति योगदान को देखते हुए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों का नामांकन किया जाता है। राष्ट्रपति का कार्यकाल सात साल का होता है।
कनेसेट इजराइल की संसद का नाम है। इसका मुख्य काम कानून बनाना है। पाँचवीं सदी ईसा पूर्व में इजा एवं नेहेमियाह ने यरूशलम में यहूदियों की प्रतिनिधि संस्था हेजेदोलाह (महान् सभा) का आयोजन किया था। इसी के आधार पर कनेसेट का नामकरण किया गया और इसके सदस्यों की संख्या १२० तय की गई।
कनेसेट अपने आम सत्रों और अपनी १५ स्थायी समितियों के जरिये कार्य करती है। ये समितियाँ निम्न हैं :- ड्रग दुरूपयोग निरोधी समिति, संविधान, कानून व न्याय समिति, आर्थिक मामलों की समिति, शिक्षा एवं संस्कृति समिति,वित्त समिति; विदेशी मामलों एवं रक्षा समिति; सदन समिति; आब्रजन एवं प्रवासी मामलों की समिति; आंतरिक मामलों एवं पर्यावरण समिति; श्रम, समाज कल्याण एवं स्वास्थ्य समिति; राज्य नियंत्रण समिति; महिलाओं की स्थिति से संबद्ध समिति; विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी समिति; बच्चों से संबद्ध समिति और विदेशी कामगारों से संबद्ध समिति।
सामान्य सत्रों में सरकारी नीतियों एवं कार्यकलापों पर तथा नए कानूनों पर आम बहस की जाती है। बहस हिब्रू भाषा में होती है। वैसे, सदस्य अरबी भाषा भी बोल सकते हैं। हिब्रू और अरबी दोनों ही सरकारी भाषाएँ हैं। इसलिए बहस का अनुवाद दोनों भाषाओं में साथ-साथ उपलब्ध कराया जाता है।
कनेसेट का चुनाव चार साल के लिए किया जाता है, लेकिन यह समय पूर्व भी भंग हो सकती है या प्रधानमंत्री द्वारा भंग की जा सकती है। जब तक चुनाव के जरिये नई कनेसेट नहीं चुन ली जाती, तब तक पुरानी कनेसेट को ही सर्वाधिकार प्राप्त होते हैं।
सरकार (मंत्रिमंडल) देश की कार्यपालिका होती है। उसे आंतरिक एवं विदेशी मामलों एवं रक्षा मामलों की जिम्मेदारी निभानी होती है। उसे इन मामलों में नीतियाँ निर्धारित करने का पूरा अधिकार होता है। अगर किसी विषय का कानूनी अधिकार किसी अन्य संस्था के पास नहीं है तो उस पर भी फैसले लेने का अधिकार सरकार को होता है। कनेसेट की तरह, सरकार का कार्यकाल भी आम तौर पर चार साल का होता है। मगर यदि प्रधानमंत्री की मृत्यु हो जाती है या वह त्याग-पत्र दे देता है या उसे महाभियोग के जरिये हटा दिया जाता है, तो सरकार का कार्यकाल कम हो जाता है। ऐसी सूरत में सरकार कनेसेट के किसी सदस्य को कार्यकारी प्रधानमंत्री नियुक्त करती है। कनेसेट में अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाने की स्थिति में सरकार और प्रधानमंत्री तब तक अपने पदों पर बने रहते हैं; जब तक नई सरकार का गठन नहीं हो जाए।
मंत्रीगण अपने कार्यों के लिए प्रधानमंत्री और कनेसेट के प्रति उत्तरदायी होते हैं। ज्यादातर मंत्रियों को एक मंत्रालय सौंपा जाता है और जिन मंत्रियों के पास कोई विभाग नहीं होता है, उन्हें कभी भी विशेष प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
अभी तक इजराइल में कई दलों की साझा सरकारें ही शासन करती आई हैं, क्योंकि किसी भी दल को अपने बूते सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिली हैं।
न्यायपालिका - इजराइल में न्यायपालिका की स्वतंत्रता की गारंटी कानून देता है। राष्ट्रपति एक विशेष नामांकन समिति की सिफारिश के आधार पर जजों की नियुक्ति करता है। इस नामांकन समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज, बार के सदस्य और सार्वजनिक हस्तियाँ होती हैं। जजों की नियुक्ति पूरे जीवन काल के लिए की जाती है, लेकिन वे ७० साल की उम्र में अनिवार्यतः सेवा निवृत कर जाते हैं।
मजिस्ट्रेट और जिला अदालतें सिविल एवं फौजदारी मामलों को निपटाती हैं। परिवहन, बाल अपराध, सैनिक, श्रम एवं म्युनिसिपल अपील अदालतें अपने-अपने क्षेत्र के केस देखती हैं। इजराइल में जूरी द्वारा ट्रायल की कोई व्यवस्था नहीं है। जहाँ तक शादी, तलाक, अभिभावकत्व, गोद लेने जैसे निजी मामलों की बात है तो उन्हें संबंधित धार्मिक समुदाय से संबद्ध आर्थिक संस्थाएँ निपटाती हैं। इजराइल में यहूदियों, मुसलमानों, द्रुज, ईसाइयों आदि के लिए अलग-अलग न्यायिक कोर्ट हैं।
मौलिक कानून - इजराइल का कोई औपचारिक संविधान नहीं है। वैसे, प्रस्तावित संविधान के अधिकतर अध्याय लिखे जा चुके हैं और इन्हें मौलिक कानून के रूप में लागू किया गया है। ये हैं :-
कनेसेट (१९५८)
इजराइल की भूमि (१९६०)
राष्ट्रपति (१९६४)
देश की अर्थव्यवस्था (१९७५)
इजराइल के सैन्य बल (१९७६)
यरूशलम (१९८०)
न्याय व्यवस्था (१९८४)
राज्य नियंत्रक (१९८८)
मानवीय सम्मान एवं स्वतंत्रता (१९९२)
पेशे की आजादी (१९९२)
सरकार (१९९२)
मौलिक कानून भी कनेसेट द्वारा उसी तरह अनुमोदित किए जाते हैं, जैसे सामान्य कानून। कानून की प्रकृति के हिसाब से उनका संवैधानिक महत्व तय होता है। किन्हीं मौलिक कानूनों में कुछ अंतर्निहित प्रावधान' होते हैं, जिनके संशोधन के लिए कनेसेट में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। सुप्रीम कोर्ट यरूशलम में है। उसका देशव्यापी क्षेत्राधिकार होता है। निचली अदालतों द्वारा दिए गए फैसलों के खिलाफ यह सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय है। सुप्रीम कोर्ट किसी भी सरकारी निकाय या एजेंट के खिलाफ याचिका की सुनवाई करता है और उसका फैसला अंतिम और सर्वोच्च होता है।
हालांकि कनेसेट को कानून बनाने का पूरा अधिकार है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को उस कानून की वांछनीयता परखने का भी पूरा हक है। न्याय की सर्वोच्च संस्था होने के नाते वह देखता है कि कनेसेट द्वारा बनाया गया कोई कानून मौलिक कानूनों के अनुरूप है या नहीं।
राज्य नियंत्राक एवं लोकपाल
राज्य नियंत्रक लोक उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक कार्यों की वैधानिकता, नियमितता, मितव्ययिता, सक्षमता, प्रभावकारिता और नैतिक पक्षों की पड़ताल (ऑडिट) करता है। इजराइल ने एक लोकतंत्र में राज्य ऑडिट के महत्व को मान्यता दी है और १९४९ में बाकायदा एक कानून बना कर राज्य कम्पट्रोलर (नियंत्रक) के पद को सुस्थापित किया है। सन् १९७१ से राज्य नियंत्रक एक लोकपाल की भी भूमिका निभा रहे हैं। जो कोई भी सरकारी विभाग राज्य नियंत्रक के ऑडिट के दायरे में आता है, यदि उसके खिलाफ किसी व्यक्ति को कोई शिकायत है तो वह इसे उनके पास रख सकता है।
राज्य नियंत्रक का चुनाव कनेसेट द्वारा गुप्त मतदान के आधार पर किया जाता है। उसका कार्यकाल सात साल का होता है। वह सरकार पर आश्रित नहीं होता है। वह अपने कार्यों के लिए सिर्फ कनेसेट के प्रति उत्तरदायी होता है। उसे अपने ऑडिट के दायरे में आने वाले तमाम सरकारी विभागों और निकायों के बही-खातों और फाइलों को मंगाने का निर्बाध अधिकार होता है। कम्पट्रोलर कनेसेट की ऑडिट मामलों से संबद्ध समिति के सम्पर्क में रह कर अपने कार्य संपन्न करता है।
इजराइल में राज्य ऑडिट का क्षेत्राधिकार दुनिया में सबसे ज्यादा है। इसमें सभी सरकारी मंत्रालय, सरकारी संस्थान, रक्षा प्रतिष्ठान की शाखाएँ, स्थानीय निकाय, सरकारी निगम, सरकारी उद्यम और ऐसे तमाम निकाय और संस्थान शामिल हैं जो ऑडिट के दायरे में घोषित किए गए हैं।
इसके अलावा राज्य नियंत्रक को विधिवत् यह अधिकार दिया गया है कि वह राजनीतिक दलों के वित्तीय मामलों, कनेसेट में प्रतिनिधित्व करने वाली तमाम राजनीतिक पार्टियों के चुनाव खर्चों तथा सामान्य लेन-देन की ऑडिट करे। जब कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो वित्तीय दंड लगाया जाता है।
चुनाव
कनेसेट के चुनाव आम, राष्ट्रीय, प्रत्यक्ष, समान, गोपनीय और आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाले होते हैं। पूरे देश के मतदाता इस चुनाव में हिस्सा लेते हैं। मतदान के दिन हर वोटर केनेसेट में अपने प्रतिनिधित्व के लिए किसी राजनीतिक पार्टी को एक वोट देता है।
इजराइल में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को काफी महत्व दिया जाता है। मतदान के दिन सार्वजनिक छुट्टी होती है। अगर मतदान के दिन कोई व्यक्ति अपने मतदान-जिले से बाहर होता है तो उसे मुफ्त परिवहन की सुविधा दी जाती है ताकि वह आसानी से अपना वोट डाल सके। सैन्य कर्मियों और विदेशों में सरकारी काम में लगे लोगों को मतदान की सुविधा प्रदान करने के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के एक जज की अध्यक्षता में एक केन्द्रीय चुनाव समिति चुनावों का संचालन करती है। इस समिति में कनेसेट में प्रतिनिधित्व करने वाली सभी पार्टियों के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं। क्षेत्रीय चुनाव समितियां स्थानीय चुनाव समितियों के कार्यकलाप पर नजर रखती हैं। स्थानीय चुनाव समितियों में निवर्तमान कनेसेट के कम-से-कम तीन दलों के प्रतिनिधि शामिल किए जाते हैं।
कनेसेट के चुनाव में वोट राजनीतिक दलों के लिए डाले जाते हैं, न कि किसी व्यक्ति के लिए। चुनावों में भाग लेने वाली पार्टियाँ विभिन्न सिद्धांतों और विश्वासों का प्रतिनिधित्व करती हैं जिस पार्टी को आम चुनाव में जितने वोट राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त होते हैं, उसी अनुपात में उन्हें संसद की सीटें दी जाती हैं। अगर किसी पार्टी को अतिरिक्त वोट मिलते हैं, जिनके आधार पर उन्हें एक सीट नहीं दी जा सकती, तो फिर उन वोटों को तमाम दलों के बीच आनुपातिक आधार पर बांट दिया जाता है या यदि चुनावों के पहले राजनीतिक पार्टियों ने आपस में कोई समझौता कर रखा है, तो फिर उसी के अनुसार उन अतिरिक्त वोटों का समायोजन कर लिया जाता है।
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