अल्पसंख्यक समुदाय

इजराइल में गैर-यहूदियों की तादाद तकरीबन १६ लाख है। यह कुल आबादी की लगभग २४ फीसदी है। सामूहिक रूप से इन्हें इजराइल का अरबी तबका कहा जाता है, लेकिन इसमें कई समुदाय आते हैं और हरेक की अपनी खासियतें हैं मुस्लिम अरब - इनकी संख्या १० लाख के करीब है। इनमें से ज्यादातर सुन्नी हैं। वे मुख्यतः छोटे शहरों और गांवों में रहते हैं। उनका जमावड़ा मोटे तौर पर इजराइल के उत्तरी भाग में है।

बेदोइन अरब - इनकी संख्या लगभग एक लाख ७० हजार है। ये भी मुस्लिम हैं। इनकी कोई ३० जनजातियां हैं। ये आम तौर पर देश के दक्षिणी भाग में रहते हैं। पहले ये घुमंतू गड़ेरिये थे, लेकिन अब वे क्रमशः स्थायी रूप से एक जगह बसने लगे हैं। वे देश के श्रमिक वर्ग में भी खुद को शामिल करने जा रहे हैं।

ईसाई अरब - इनकी आबादी लगभग एक लाख १७ हजार है। वे अधिकांशतः नाजरेथ, शफराम और हैफा जैसे शहरी इलाकों में रहते हैं। इनमें से ज्यादातर ग्रीक कैथोलिक, ग्रीक ऑर्थोडॉक्स और रोमन कैथोलिक चर्चों से जुड़े हैं। बाकी अरबों की संख्या अपेक्षाकृत काफी कम है।

इजराइली व्यंजन
भारत - इज़राइल संबंध
धार्मिक और त्योहारी चीजें
जायोनिसम
दूध् और शहद की ध्रती
तेल अवीव
कृषि
मृत सागर
नोबेल पुरस्कार विजेता
पानी प्रोफेसर एवनर एडिन
नाजरथ
किबुत्ज
सेनाएं
सम्पर्क करें
Useful Links
 

द्रुज - इनकी आबादी कोई एक लाख १३ हजार है। वे अरबी भाषाभाषी हैं। वे देश के उत्तरी हिस्से में स्थित २२ गांवों में बसते हैं। वे अपनी अलग सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान रखते हैं। बाहरी लोगों के लिए द्रुज मजहब के दरवाजे खुले नहीं हैं। मगर उनके दर्शन का एक सिद्धांत बड़ा जाना-माना है और वह है ताकिया'। इस सिद्धांत के अनुसार, द्रुज जिस देश में रहते हैं, वे उसके प्रति पूरी निष्ठा रखते हैं।

सिरकासियंस - इनकी संख्या महज तीन हजार के करीब है। वे ज्यादातर उत्तर के दो गांवों में रहते हैं। वे सुन्नी मुस्लिम हैं, हालांकि उनका अरब मूल या आम इस्लामी संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है। वे न तो मुस्लिम समुदाय में और न ही यहूदी समुदाय में खुद को आत्मसात करते हैं, बल्कि वे अपनी अलग जातीय पहचान बनाए रखते हैं। इसके बावजूद वे देश के आर्थिक और राष्ट्रीय मामलों में खुल कर शामिल होते हैं।

अरबों का सामुदायिक जीवन

आर्थिक हालात के मद्देनजर अरब लोगों का आना-जाना लगा रहता है। १९वीं सदी के उत्तरार्द्ध में जब यहूदी समुदाय ने तेज आर्थिक तरक्की की, तो काफी तादद में अरब समुदाय के लोग रोजगार के अवसरों, ऊंची पगार और उच्च जीवन-स्तर की संभावनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र में आएइजराइल की अरब आबादी स्वावलम्बी शहरों और गांवों में रहती है। उनका जमावड़ा गैलिली, नाजारेथ, हदेरा और पेताह तिक्वा के बीच के इलाकों, नाठोव और यरूशलम, अक्को, हैफा, लोद, राम्ले और यात्रो जैसे मिश्रित शहरी केन्द्रों में है।

अरब आबादी मुख्यतः मध्यवर्गीय और कामकाजी समुदाय है। इजराइल जैसे केन्द्रीकृत मुल्क में राजनीतिक रूप से वे हाशिये पर रहते हैं। हिब्रू बहुल समाज में अरबी बोलने वाले वे अल्पसंख्यक लोग हैं। वे अपनी अलग पहचान विभिन्न तरीकों से बनाए रखते हैं। उनकी भाषा अरबी को दूसरी सरकारी भाषा का दर्जा हासिल है। उनकी पृथक अरब/द्रुज स्कूल प्रणाली है। उनके अरबी मीडिया, साहित्य और थिएटर हैं। मुस्लिम, द्रुज और ईसाई अरबों के अपने कोर्ट हैंजो निजी मामलों में फैसले देते हैं। पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों को वे अभी अपने दैनिक जीवन में अपनाते हैं, लेकिन अनिवार्य शिक्षा की शर्तों और लोकतांत्रिक प्रणाली में भाग लेने की वजह से उनका जनजातीय और पितृसत्तात्मक स्वरूप काफी हद तक बदल रहा है। वे क्रमशः परंपरागत जीवन शैली के दायरे से बाहर निकल रहे हैं। इजराइल के कानूनों के असर से अरब समुदाय की महिलाओं की स्थिति में भी खासा फर्क आया है। इजराइल में महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिया गया है और बहु विवाह एवं बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर रोक लगा दी गई है।

राष्ट्रीय और नगरपालिका चुनावों में अरब समुदाय की भागीदारी खूब दिखती है। अरब लोग अपनी नगरपालिकाओं की राजनीतिक-प्रशासनिक व्यवस्था खुद संभालते हैं। देश की संसद कनेसेट में अरब लोगों के हितों की रक्षा उनके चुने हुए प्रतिनिधि करते हैं। उनके प्रतिनिधि अल्पसंख्यकों की स्थिति को सुधारने और राष्ट्रीय विकास में उनकी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक रूप से सक्रिय रहते हैं

सन्‌ १९४८ में इजराइल की स्थापना के वक्त से ही अरब समुदाय के लोगों को अनिवार्य सैन्य सेवा से परे रखा गया है। उनके पारिवारिक, धार्मिक और अरब मुल्कों से सांस्कृतिक संबंधों के मद्देनजर ऐसा किया गया है। अरब देशों ने इजराइल पर कई हमले किए हैं। इससे अरब समुदाय के लोगों की दोहरी निष्ठा की आशंका बनी रहती है। फिर भी, उन्हें इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जाता है कि वे खुद सैन्य सेवा के लिए आगे आएं और कुछ लोग हर साल सैन्य सेवा में शामिल भी हो रहे हैं। सन्‌ १९५७ में द्रुज और सिरकासियन समुदाय के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा लागू कर दीगई है, क्योंकि ऐसा करने का अनुरोध उनके नेताओं ने ही किया था। बेदोइन समुदाय के लोगों की भी फौज में तादाद क्रमशः बढ़ती जा रही है।

अरब-यहूदी समीकरण

अरब नागरिक इजराइल की कुल आबादी का छठा भाग हैं। यहूदियों और फलस्तीनियों के संघर्ष के हाशिये पर वे बने रहते हैं। हालांकि वे अपना अलग सांस्कृतिक वजूद बनाए रखते हैं और इजराइल के एक यहूदी मुल्क होने पर भी विवाद खड़े करते हैं, लेकिन वे अपना भविष्य इजराइल के साथ बंधा हुआ ही देखते हैं। इस प्रक्रिया में, उन्होंने हिब्रू भाषा को अपनी दूसरी भाषा के रूप में अपना लिया है और अपनी जीवनचर्या में इजराइली संस्कृति के ताने-बाने को भी समेट लिया है। साथ-साथ, वे राष्ट्रीय जीवन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं, आर्थिक क्रिया-कलापों से खुद को जोड़ते हैं और अपने गांवों व शहरों के लिए ज्यादा-से-ज्यादा लाभ जुटाने का प्रयत्न करते रहते हैं।

इजराइल के दो प्रमुख वर्गों - यहूदी और अरब समुदाय में आपसी समीकरण उम्दा नहीं है। इसका कारण यह है कि उनके मजहबी, राजनीतिक और सामाजिक मूल्य अलग-अलग हैं। फिर भी, वक्त गुजरने के साथ-साथ दोनों समुदायों ने एक-दूसरे के वजूद को और उनकी पृथक पहचान व आकांक्षाओं को स्वीकार कर लिया है। वे एक ही नदी के दो किनारों के समान साथ-साथ चल रहे हैं।

 
परिचय | संस्कृति | आर्थिक व्यवस्था | इजराइल | राजनीतिक ढांचा | यहूदी त्यौहार | अल्पसंख्यक समुदाय | नाजरथ | यरुशलम | होलोकॉस्ट
इस्राइली व्यंजन | भारत-इस्त्रााइल संबंध/ | धार्मिक और त्योहारी चीजें | जियॉनिज्म | दूध् और शहद की ध्रती | सेनाएं
तेल अवीव | कृषि | मृत सागर | नोबेल पुरस्कार विजेता | पानी प्रोफेसर एवनर एडिन
| किबुत्ज