किबुत्ज

तकरीबन सौ साल पहले यहूदीवाद और समाजवादी आदर्शों से प्रेरित पूर्वी यूरोप के युवा यहूदियों के एक छोटे-से समूह ने गैलिली समुद्र के तट पर पहला किबुत्ज बनाया था। वे किबुत्ज को एक परस्पर गुँथे हुए उदान्त समुदाय के रूप में देखते थे। इसमें उत्पादन और उपभोग के साधनों पर सामूहिक स्वामित्व था। इसमें वे तमाम फैसले आपसी विचार-विमर्श कर बहुमत के आधार पर करते थे और उनकी सामूहिक जिम्मेदारी निभाते थे।

परिभाषा के अनुसार, किबुत्ज एक ऐसा स्वैच्छिक सामूहिक समुदाय हैं जो मुख्यतः कृषि पर आधारित होता है, जिसमें सम्पत्ति का निजी स्वामित्व नहीं होता और जो अपने तमाम सदस्यों और उनके परिवारों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उत्तरदायीै है।

इजराइल की स्थापना के शुरूआती दशकों में, कुछेक उतार-चढ़ाव के बावजूद, आबादी और आर्थिक लिहाज से किबुत्जवाद का तेजी से प्रसार हुआ।

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शुरूआती पांच दशकों में नए इजराइल राज्य के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक ढांचे के विकास में किबुत्ज के सदस्यों ने मौलिक योगदान किया किबुत्ज के सदस्य सामाजिक और वैचारिक रूप से श्रेष्ठ-वर्ग माने जाते रहे। यहां तक कि इजराइल के पहले प्रधानमंत्री डेविड बेनगुरियन ने अपनी राजनीतिक पारी समाप्त करने के बाद दक्षिणी इजराइल के नेगेव मरूस्थल स्थित साडे बोकर' नामक किबुत्ज में ही शरण ली। फिर भी, नब्बे के दशक से किबुत्ज के सभी रूपों में बदलाव आते रहे हैं। इसमें सामूहिक स्वामित्व, पारिवारिक जीवन, आर्थिक मॉडल, सार्वजनिक संस्थाएं आदि पक्ष भी शामिल हैं। आम तौर पर, किबुत्ज जीवन चलता रहेगा। यह विचारधारा और व्यावहारिकता के समन्वय के तौर पर अनूठी जीवन शैली के प्रतीक के रूप में जिन्दा रहेगा। यह एक ऐसे ख्वाब की याद दिलाता रहेगा जो वक्त के साथ रूपांतरित हो गया है।
 
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