भारत - इजराइल संबंध

भारत और इजराइल के व्यापारिक संबंध हर क्षेत्र में फल-फूल रहे हैं। इनके द्विपक्षीय नागरिक व्यापार में साल २००६ में खासी बढ़ोतरी हुई है। यह पिछले दशक के २०० मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़ कर २७ बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों देशों ने अगले पांच सालों में अपने इस व्यापार को पांच बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

साल २००२ में आपसी व्यापार के क्षेत्र में आई ४३ प्रतिशत की छलांग को अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था की मंदी के कारण आई सुस्ती से उबरने वाला साल माना जाए, तो २००३ और २००४ को दोनों देशों के बीच के व्यापार को मजबूती प्रदान करनेवाले साल कह सकते हैं। २००३ में २५ प्रतिशत की बढ़ोतरी से जहां व्यापार १.५ बिलियन अमरिकी डॉलर तक पहुंच गया, वहीं साल २००४ में यह द्विपक्षीय व्यापार ३६ प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ २.१५ बिलियन अमरिकी डॉलर तक जा पहुंचा। साल २००६ के दौरान यह आपसी व्यापार २ ७ बिलियन अमरिकी डॉलर का रहा। इस चढ़ते व्यापारिक ग्राफ की बदौलत भारत, एशिया में इजराइल का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा बड़ा आयातक देश बन गया है।

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मौजूदा समय में दोनों देशों के बीच का व्यापार बहुत फैला हुआ है। इसमें हीरे, कीमती पत्थर , रासायनिक पदार्थ तथा टेलिकॉम और खेती में प्रयोग आने वाले उपकरणों से ले कर उच्च तकनीक वाले मेडिकल उपकरण तक शामिल हैं। भारत में फिलहाल सौ से भी अधिक इजराइली कंपनियां या तो स्वतंत्र रूप से या साझेदारी में काम कर रही हैं। एक बड़ी सूची उन कंपनियों की भी है जो अपने आप को यहां स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं।

दोनों देशों के विशेष के प्रतिनिधिमंडल टेलिकॉम, एग्रीकल्चर, कैपिटल वेंचर, पर्यावरण और आंतरिक सुरक्षा सहित अन्य कई क्षेत्रों में व्यापार की संभावनाओं का पता लगाने के लिए एक-दूसरे के यहां बराबर आते-जाते रहते हैं। प्रतिनिधिमंडलों की यह आवाजाही भी दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों का सूचक है। २००४ की जनवरी में भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री अरुण जेटली ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए येरुशलम में संयुक्त आर्थिक समिति की तीसरी मीटिंग में शिरकत की थी। इजराइली उप प्रधानमंत्राी एहुद अल्मर्ट ने, जो उद्योग-व्यापार, श्रम तथा संचार मामलों के मंत्री थे, उन्होंने उसी साल दिसंबर ६ से ९ तक एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत का दौरा किया था। २००५ में भारत के साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्री कपिल सिब्बल के इजराइली दौरे के समय दोनों देशों ने मिल कर साइंस के क्षेत्र में शोध और विकास को बढ़ावा देने के लिए एक कोश का भी गठन किया। यह कोश संयुक्त व्यावसायिक विकास के लिए निवेशकों और उद्यमियों को सहायता प्रदान करता है।

श्री सिब्बल और श्री अल्मर्ट ने उस समझौते पर भी दस्तखत किए जिसके तहत दोनों पक्ष शुरू में उद्यमियों को जोखिम मुक्त अनुदान देने के लिए एक-एक मिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान करेंगे। इसके अलावा दोनों मंत्री समान हितों के पांच अन्य क्षेत्रों में सहयोग करने पर सहमत हुए, जिसमें नैनो टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, जल प्रबंधन, पारंपरिक उर्जा स्त्रोत और स्पेस एयरोनॉटिक्स शामिल हैं।

नवंबर २००५ में जब भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री कमलनाथ इजराइल गए थे, तब एक ज्वाइंट स्टडी ग्रुप जेएसजी का भी गठन किया गया, ताकि २००८ तक द्विपक्षीय व्यापार को ५ बिलियन डॉलर तक पहुंचाया जा सके। उसी समय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौतों के लिए प्रस्तावित एक्च्चन प्लान को भी मंजूरी मिली। इससे आपस में वस्तु और सेवा क्षेत्रों के व्यापार, पारस्परिक निवेच्च एवं शोध और विकास की परियोजनाओं को गति मिलेगी।

भारतीय कृषि मंत्री श्री शरद पवार ने भी नवंबर २००५ के अपने इजराइली दौरे में यहां के कृषि मंत्री एस्त्राएल कॉज के साथ बैठक में एक ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप यानी जेडब्लूजी के गठन का निर्णय लिया। इसका काम दोनों देशो में स्थित उन संस्थानों का पता लगाना है जो एग्रीकल्चर और साइंस के क्षेत्र में शोध में मददगार साबित हों। रिसर्च में क्रॉप टेक्नोलॉजी, माइक्रो एरिगेच्चन, डेयरी, फूड-प्रोसेसिंग और फूड प्रोडक्ट्स के साझा मार्केटिंग पर विच्चेष ध्यान दिया जाएगा।

मई २००६ में एग्रीटेक प्रदर्च्चनी के अवसर पर भारतीय कृषि मंत्री शरद पवार की अगुवाई में एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने फिर से इजराइल का दौरा किया। इस प्रतिनिधिमंडल में राजस्थान, गुजरात और नागालैंड के मुख्यमंत्रियों के साथ अन्य भारतीय राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। इस यात्रा के दौरान दोनों सरकारों ने कृषि के क्षेत्र में सहयोग के लिए तीन सालों की एक कार्य योजना पर भी हस्ताक्षर किए।

दिसम्बर २००६ में भी दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेच्च संबंधों में मजबूती प्रदान करने के लिए इजराइली उप प्रधानमंत्री और व्यापार, उद्योग एवं श्रम मामलों के मंत्री श्री एलियाउ येच्चाय ने ५० प्रमुख इजराइली उद्यमियों के साथ भारत का दौरा किया और जेएसजी की संस्तुतियों के आधार पर प्रीफेरेंच्चियल टेरेड एग्रीमेंट पीटीए पर बातचीत की इजराइली उपप्रधानमंत्री और परिवहन एवं सड़क सुरक्षा मंत्री श्री शॉल मॉफेज के साथ इजराइली परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने जी मार्च २००७ में भारत का दौरा किया। तब उन्होंने भारतीय रेलमंत्री श्री लालू प्रसाद, नागरिक उड्डयन मंत्री श्री प्रफुल्ल पटेल और सड़क परिवहन, हाइवे तथा जहाजरानी के मंत्री श्री टीआर बालू से भेंट की थी। इस दौरान श्री माफेज प्रमुख इन्फ्रास्टरक्चर कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ मुम्बई मेटरोपॉलिटन रीजन डेवेलपमेंट अथॉरिटी के अधिकारियों से भी मिले थे।

 
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