प्रिय मित्रों,

इजराइल की स्थापना के ६० साल पूरे होने पर हिंदी में यह अनूठा प्रकाशन प्रस्तुत करना वास्तव में मेरे लिए सम्मान और विशेषाधिकार की बात है। हम दोनों देशों और लोगों के बीच की गहरी दोस्ती अब एक मिसाल बन चुकी है। यह दोस्ती दोनों प्राचीन सभ्यताओं की उपलब्धियों के समस्त आयामों को समाहित करती है, जो व्यापार, संस्कृति, कृषि, विज्ञान, शिक्षा और कई अन्य क्षेत्रों से जुड़े हैं।

भारत और इजराइल विश्व समुदाय के सामने धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता व सहिष्णुता का उदाहरण पेश करते हैं।

शुभ इच्छाओं के साथ
नमस्ते
महामहिम मार्क सोफेर
इजराइल के राजदूत

और
इजराइली व्यंजन
भारत - इज़राइल संबंध
धार्मिक और त्योहारी चीजें
जायोनिसम
दूध् और शहद की ध्रती
तेल अवीव
कृषि
मृत सागर
नोबेल पुरस्कार विजेता
पानी प्रोफेसर एवनर एडिन
नाजरथ
किबुत्ज
सेनाएं
सम्पर्क करें
Useful Links
 

जायोनिसम क्या है ?
जायोनिसम यहूदी लोगों के आत्मनिर्णय की पुर्नस्थापना और इजराइल की जमीन पर यहूदी संप्रभुता की बहाली के लिए आंदोलन है। ७० सीई में रोमनों ने यहूदी लोगों के पवित्र मंदिरों को ध्वस्त और यहूदियों की धार्मिक व प्रशासनिक राजधानी यरुशलम को तबाह कर दिया। यहूदी स्वतंत्रता खत्म हो गई और उसके बाद के दशकों में ज्यादातर यहूदी इजराइल की जमीन से निर्वासित कर दिए गए। लेकिन उन्होंने दोबारा लौटने की उम्मीद कभी नहीं छोड़ी। उन्होंने प्रार्थनाओं और साहित्य के जरिए इस प्रतिबद्धता का इजहार किया।

इज़राइल एक छोटा सा देश है, जो रेगिस्तान से सटा है। यहां की आबादी करीब 70 लाख है। इसका सकल घरेलू उत्पाद 120 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास है यानी प्रति व्यक्ति जीडीपी 25,000 अमेरिकी डॉलर। इस्राइल की कुल भूमि का क्षेत्रफल 21,000 वर्ग किलोमीटर है। इसमें सिफ‍र् 4,40,000 हेक्टेयर यानी 20 फीसदी भूमि ही खेती लायक है। असल में खेती 3 लाख 60 हजार हेक्टेयर भूमि पर होती है, जिसमें 1 लाख 80 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है। इज़राइल की आधी से ज्यादा भूमि बंजर है। इस देश में मौसम की कठिन परिस्थतियों और जल की गंभीर कमी का सामना करना पड़ता है।

तकरीबन सौ साल पहले यहूदीवाद और समाजवादी आदर्शों से प्रेरित पूर्वी यूरोप के युवा यहूदियों के एक छोटे-से समूह ने गैलिली समुद्र के तट पर पहला किबुत्ज बनाया था। वे किबुत्ज को एक परस्पर गुँथे हुए उदान्त समुदाय के रूप में देखते थे। इसमें उत्पादन और उपभोग के साधनों पर सामूहिक स्वामित्व था। इसमें वे तमाम फैसले आपसी विचार-विमर्श कर बहुमत के आधार पर करते थे और उनकी सामूहिक जिम्मेदारी निभाते थे।

होलोकॉस्ट क्या था ?
होलोकॉस्ट समूचे यहूदी लोगों को जड़ से खत्म कर देने का सोचा-समझा और योजनाबद्ध प्रयास था।
१९३३ में अडोल्फ हिटलर जर्मनी की सत्ता में आया और उसने एक नस्लवादी साम्राज्य की स्थापना की, जिसमें यहूदियों को सब-ह्यूमन करार दिया गया और उन्हें इंसानी नस्ल का हिस्सा नहीं माना गया। १९३९ में जर्मनी द्वारा विश्व युद्ध भड़काने के बाद हिटलर ने यहूदियों को जड़ से मिटाने के लिए अपने अंतिम हल (फाइनल सोल्यूशन) को अमल में लाना शुरू किया। उसके सैनिक यहूदियों को कुछ खास इलाकों में ठूंसने लगे। उनसे काम करवाने, उन्हेंएक जगह इकट्ठा करने और मार डालने के लिए विशेष कैंप स्थापित किए गए, जिनमें सबसे कुख्यात था ऑस्चविट्ज। यहूदियों को इन शिविरों में लाया जाता और वहां बंद कमरों में जहरीली गैस छोड़कर उन्हें मार डाला जाता।

 
परिचय | संस्कृति | आर्थिक व्यवस्था | इजराइल | राजनीतिक ढांचा | यहूदी त्यौहार | अल्पसंख्यक समुदाय | नाजरथ | यरुशलम | होलोकॉस्ट
इस्राइली व्यंजन | भारत-इज़राइल संबंध | धार्मिक और त्योहारी चीजें | जियॉनिज्म | दूध् और शहद की ध्रती | सेनाएं
तेल अवीव | कृषि | मृत सागर | नोबेल पुरस्कार विजेता | पानी प्रोफेसर एवनर एडिन
| किबुत्ज