यहूदी श्रद्धालु इस दिन कई घंटे उत्सव संबंधी खानपान और सिनेगॉग सर्विस में बिताते हैं। वे इस दिन यात्रा करने से बचते हैं और बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करते।
रोश हशाना :
यह यहूदी नववर्ष को चिह्नित करता है। इसकी उत्पत्ति बाइबल ( लेव २३ः२३-२५) से जुड़ी है : एक पवित्र अवसर जो जोरदार धमाकों के साथ मनाया जाता है।'' रोश हशाना शब्द रैबिनिकल है, जिसका जिक्र साल की शुरुआत '' के रूप में आता है। इस त्योहार के प्रसंग हैं : प्रायश्चित, दैवीय फैसले'' के दिन की तैयारी और लाभदायक साल के लिए प्रार्थना। यह दो दिवसीय त्योहार यहूदी कैलंडर में १-२ तिशरी को मनाया जाता है, जो अंग्रेजी कैलंडर के मुताबिक आमतौर पर सितंबर में पड़ता है। सभी यहूदी त्योहारों की तरह यह भी पिछली शाम से शुरू हो जाता है। रोश हशाना की मुख्य रस्मों में लंबे समय तक चलने वाली एक सिनेगॉग सर्विस के बीच शोफर (बिगुल जैसा वाद्ययंत्र) बजाना और नए साल की खुशी में घरों में तरह-तरह के पकवान बनाना शामिल है। कई मायनों में इजराइल नया साल रोश हशाना से शुरू होता है। सरकारी प्रपत्रों, अखबारों और प्रसारणों में सबसे पहले यहूदी तारीख'' का जिक्र होता है।
योम किपूर
रोश हशाना के आठ दिन बाद आने वाला योम किपूर प्रायश्चित, दैवी फैसले और आत्माओं के कष्ट'' (लेव. २३ः२६ः३२) का दिन होता है, ताकि व्यक्तियों के पाप धोए जा सकें। यह उपवास का एक मात्र दिन है, जिसका निर्देश बाइबल में है। यह अपने बुरे कर्मों को गिनने और अपनी खामियों पर विचार करने का दिन होता है। एक यहूदी से इस दिन अपेक्षा की जाती है कि वह आदमी और ईश्वर के बीच के पापों को क्षमा करने के लिए प्रार्थना करे और अपने साथियों के प्रति किए गए गलत कामों को सुधारे। योम किपूर की प्रमुख रस्मों - लंबी भक्ति सेवाएं और २५ घंटे का उपवास- का पालन अन्य धर्मों के लोग भी करते हैं। लोकप्रियता के लिहाज से यह सबसे बड़ा त्योहार है। इस दिन देश २५ घंटों के लिए पूरी तरह से ठहर जाता है। मनोरंजन के स्थान बंद रहते हैं। टीवी और रेडियो का प्रसारण नहीं होता, खबरों तक का नहीं। सार्वजनिक यातायात स्थगित रहता है। यहां तक की सड़कें भी पूरी तरह बंद हो जाती हैं। १९७३ के युद्ध की स्मृति के कारण इजराइल में योम किपूर के खास मायने भी हैं। इसी दिन मिस्र और सीरिया ने इजराइल पर अचानक हमला बोल दिया था।
सुकौत :
बाइबल (लेव २३ः३४) में इसका वर्णन ''फीस्ट ऑफ टैबरनेकल्स'' के रूप में किया गया है। यह योम किपूर के पांच दिन बाद आता है। सुकौत उन तीन त्योहारों में से है, जो (७० सीई तक) यरुशलम के टेंपल की सामूहिक तीर्थयात्रा के साथमनाए जाते थे और इसीलिए जिन्हें अब ''तीर्थ त्यौहार'' के तौर पर जाना जाता है। यहूदी सुकौत को मिस्र से पलायन या एक्सॉडस (१३वीं सदी बीसीई) की स्मृति में मनाते हैं और अच्छी फसल के लिए शुक्रिया अदा करते हैं। कुछ समुदायों में यह चैग हासिफ (फसल पर्व) के रूप में भी मनाया जाता है, जहां दूसरी फसल की कटाई, शरद फलों का भंडारण, खेती के सीजन की शुरुआत और पहली बारिश- इस त्योहार के प्रसंग होते हैं।
योम किपूर और सुकौत के बीच के पांच दिनों में हजारों गृहस्थ और कारोबारी अपने यहां सुकोत (अस्थायी तौर पर रहने के लिए बनाया गया बूथ) खड़ा करते हैं। ये उन रेगिस्तानी बूथों के प्रतीक होते हैं, जिनमें मिस्र से पलायन के बाद इजराइली रहते थे। इनमें खजूर के पत्ते, नींबू, मेंहदी और विलो की शाखाएं सजाई जाती हैं, जिनसे प्रार्थना की रस्में भी अदा की जाती हैं। देश भर में - पार्किंग की जगहों, बालकनी, छतों, गलियारों और सार्वजनिक स्थलों पर - हर जगह सुकोत नजर आते हैं। कोई ऐसा सैन्य अड्डा नहीं होता, जहां सुकोत न हो। कुछ श्रद्धालु, त्योहार और उसके बाद के छह दिन अपने सुकोत में रहकर बिताते हैं, जबकि ज्यादातर लोग वहां सिर्फ भोजन करते हैं। इजराइल में सुकोत का ''हॉलिडे'' वाला हिस्सा ( और दो अन्य तीर्थ त्योहार पासोवर और शवौत) एक ही दिन के लिए मनाया जाता है, जबकि प्रवासी समुदाय इसे दो दिनों तक मनाता है।
प्रार्थना सर्विस अतिरिक्त प्रार्थनाओं के साथ संपन्न होती है, जिनमें हल्लेल ( दुआ और याचना गीतों का संग्रह, जो हर चंद्रमास के आरंभ में रोश खोदेश और तीर्थ त्योहारों पर गाया जाता है) भी शामिल होता है। उत्सव वाले दिन के बाद भी सुकोत का आयोजन जारी रहता है, हालांकि इस दौरान पवित्रता या शुद्धता का बंधन कम हो जाता है, जैसाकि तोरा (लेव २३ः३६) में निर्देशित है। इस बीच के सप्ताह-आधा उत्सवपूर्ण, आधा सामान्य- के दौरान स्कूल बंद रहते हैं और कारोबार या तो बंद होते हैं या फिर काम के घंटे कम हो जाते हैं। ज्यादातर इजराइली सुकोत और पासोवर के दिन मनोरंजक स्थलों पर बिताते हैं। इस विशेष हफ्ते और हॉलिडे सीजन का समापन शेमिनी अत्सेरेट (आठवें दिन का पवित्र अवसर - लेव २३ः३६ ) पर होता है, जिससे सिमहट तोरा को जोड़ा जाता है। शेमिनी अत्सेरेट या सिमहट तोरा उत्सव का फोकस तोरा पर ही होता है। इस दौरान लोग बांहों में तोरा स्क्रॉल के साथ सामूहिक नृत्य करते हैं और तोरा के शुरुआती और आखिरी अध्यायों का पाठ करते हैं। अंधेरा होने के बाद भी कई समुदाय जश्न जारी रखते हैं, जो प्रायः घर के बाहर मनाए जाते हैं। इस दौरान विधि-विधान की वे पाबंदियां नहीं होतीं, जो पवित्र दिन में लागू होती हैं।
हनुका :
२५ किसलेव (प्रायः दिसंबर में ) को शुरू होने वाला हनुका ग्रीक शासकों (१६४ बीसीई) पर यहूदियों की जीत के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस जीत को दो रूपों में देखा जाता है : शक्तिशाली ग्रीस के खिलाफ छोटे यहूदी राष्ट्र की भौतिक जीत और यूनानियों के हेलेनिज्म के खिलाफ यहूदी आस्था की आध्यात्मिक जीत। त्योहार की पवित्रता जीत के आध्यात्मिक पहलू और तेल की कुप्पी के चमत्कार से जुड़ी है। वह चमत्कार, जब टेंपल के कैंडल को एक दिन के लिए जलाने के लिए रखे गए जैतून के तेल से वह आठ दिनों तक जलता रहा।
हनुका इजराइल में और प्रवासियों में भी आठ दिनों तक मनाया जाता है। इस त्योहार का सबसे खास लक्षण हर शाम मोमबत्तियां जलाना है। मंदिर में हुए चमत्कार की तर्ज पर पहली रात एक, दूसरी रात दो, तीसरी रात तीन और इसी तरह आठवीं रात तक। हनुक्का का संदेश इजराइल की पुनः कायम की गई संप्रभुता पर जोर देता है। इसकी रस्में प्रवासियों के बीच भी कायम हैं। इस मौके पर एक खास तरह का चौकोर लट्टू उपहार में दिए जाने का चलन है। इस पर हिब्रू में चार अक्षर लिखे होते हैं, जो इस संदेश को दर्शाते हैं, एक बड़ा चमत्कार यहां हुआ। प्रवासियों के लिए इन अक्षरों का मतलब होता है, एक बड़ा चमत्कार वहां हुआ। इस दौरान हफ्ते भर के लिए स्कूल बंद होते हैं, लेकिन कारोबार और दफ्तर खुले रहते हैं।
तू बी'शेवत :
यह शेवत के पंद्रवें दिन (जनवरी- फरवरी) मनाया जाता है, जिसे यहूदी धार्मिक स्रोतों में फलदार वृक्षों का नया साल कहा गया है। इसमें विधि-विधान नहीं के बराबर होते हैं। लेकिन इसने एक ऐसे धर्मनिरपेक्ष अवसर का रूप ले लिया है, जब लोग खासकर स्कूली बच्चे पेड़-पौधे लगाते हैं। यह एक ऐसे दिन के तौर पर आता है, जब यहूदी नैशनल फंड और स्थानीय अधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाता है। इस महीने हालांकि ठंड रहती है, पर फलदार वृक्षों में फूल लगने लगते हैं। शुरूआत बादाम के पेड़ों से होती है।
पुरिम :
एक अन्य यहूदी त्योहार जो बसंत के शुरू में १४ अदर को पड़ता है। यह अर्टैक्सरेक्सेज के अधीन पर्सियन साम्राज्य में यहूदियों की मुक्ति के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। स्क्रॉल ऑफ इस्टर'' में इसका वर्णन है। यह हंसी-खुशी और आनंद का त्योहार है। इस दिन स्कूल बंद रहते हैं। हर तरफ उत्सव का माहौल होता है। पुरिम के दिन अप्रैल फूल की तर्ज पर अखबारों में नकली खबरेंया अफवाहें देखी जा सकती हैं। हंसीखुशी के बीच स्क्रॉल ऑफ इस्टर'' का पाठ होता है, जिसमें जब कभी खलनायक हमैन'' का जिक्र आता है, लोग खूब शोर मचाते हैं। जो पारंपरिक किस्म के लोग हैं, वे इस दिन संयम के साथ मद्यपान करते हैं, सुबह-शाम एस्थर का पाठ करते हैं, गरीबों को दान देते हैं, एक दूसरे को उपहार देते हैं और अच्छा खान-पान करते हैं।
पासोवर ;पेस्साद्ध :
वसंत में मनाया जाने वाला यह त्योहार १५ निसान को शुरू होता है। यह मिस्र से पलायन (१३वीं सदी बीसीई) और बंधनों से आजादी के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस त्योहार के पीछे स्वतंत्रता की प्रबल भावना है। पासोवर की रस्में त्यौहार से काफी पहले शुरू हो जाती हैं। इस दौरान लोग अपने घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सफाई करते हैं। त्योहार के एक दिन पहले तैयारी की रस्में होती हैं। इनमें मनाही वाले खाद्य पदार्थों को समारोहपूर्वक जलाया जाता है। त्योहार की शाम सेदर (समारोह भोज) होता है, जिसमें परिवार के अलग हुए सदस्य हगादा पढ़ने के लिए एकत्र होते हैं और पारंपरिक व्यंजनों खासतौर पर मात्जा का लुत्फ उठाते हैं। अगले दिन के रिवाज अन्य तीर्थ त्योहारों जैसे ही होते हैं।
पासोवर, यॉम किपर के बाद ऐसा त्योहार है, जिसे गैर यहूदी भी मनाते हैं। इसके अलावा कुछ समुदायों के बीच त्योहार के कृषि महत्व से जुड़ीं कुछ रस्में मनाने का भी चलन है। इसे एक वसंत उत्सव, आज+ादी के त्योहार और पहली फसल की कटाई के तौर पर देखा जाता है। पासोवर में एक अन्य इंटरमीडिएट''सप्ताह (फाइव हाफ सैक्रेड, हाफ ऑर्डिनरी डेज), जिस दौरान अतिरिक्त प्रार्थनाएं होती हैं और उल्लास का माहौल कायम रहता है। यह एक अन्य समारोहपूर्ण दिन के साथ खत्म होता है।
होलोकॉस्ट शहीद और नायक समृति दिवस :
पासोवर के बाद एक हफ्ते से भी कम समय में इजराइल के लोग उन साठ लाख यहूदी शहीदों को याद करते हैं, जो होलोकॉस्ट में नाजियों के हाथों मारे गए। इस दिन सामूहिक शोक के आधुनिक संस्कार और खास समारोह आयोजित किए जाते हैं। सुबह १० बजे एक सायरन बजाया जाता है और पूरा राष्ट्र दो मिनट का मौन रखता है। यह दिन शहीदों को याद करने और कभी न भूलने के लिए दूसरों को याद दिलाने'' की भावना पर जोर देता है।
इजराइल यु( के शहीदों की स्मृति :
यह एक हफ्ते बाद उन लोगों के सम्मान में मनाया जाता है, जो इज+राइल राज्य की स्थापना के संघर्ष और इसकी रक्षा में मारे गए। स्मृति दिवस की शाम को ८ बजे और अगले दिन सुबह ११ बजे सायरन बजने पर दो मिनट का मौन रखा जाता है। यह अवसर होता है, जब पूरा राष्ट्र अपने उन बेटे-बेटियों के प्रति चिरस्थायी आभार व्यक्त करता है, जिन्होंने देश की आजादी हासिल करने और उसे बचाए रखने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी।
स्वतंत्राता दिवस :
यह स्मृति दिवस के ठीक अगले दिन (५ ईयार) पड़ता है। इसे इज+राइल की स्थापना की घोषणा (१४ मई १९४८) की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भी इजराइल की स्थापना के संघर्ष में मारे गए शहीदों को याद किया जाता है। चूंकि यह कोई बहुत पुराना समारोह नहीं है, इसलिए यह उन जीवित लोगों के लिए काफी मायने रखता है, जिन्होंने शारीरिक और सक्रिय रूप से नए राज्य के गठन और उसकी रक्षा के लिए संघर्ष में हिस्सा लिया और उन तमाम बदलावों के साक्षी बने जो १९४८ के बाद हुए। स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर नगरपालिकाएं जन समारोह कराती हैं। लाउड स्पीकरों पर लोकप्रिय संगीत बजते हैं स्वतंत्रता दिवस पर कई नागरिक, आजादी की जंग के मैदानों को देखने के मकसद से ग्रामीण इलाकों का रुख करते हैं, शहीदों के स्मारकों का दौरा करते हैं और पिकनिक पर जाते हैं। इस दिन साहित्य, कला और विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार (इजराइल प्राइजेस) दिए जाते हैं। यहूदी युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय बाइबल प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। सैन्य अड्डे अवाम के लिए खुले होते हैं। एयरफोर्स और नेवी की प्रदर्शनियां आयोजित होती हैं।
लैग बी'ओमर ;१८ ईयारद्ध :
यह पासोवर और शवौत के बीच के सप्ताहों की गिनती में ३३वें दिन पड़ता है। यह बच्चों के उत्सव के रूप में लोकप्रिय है। इस दौरान विशाल बोनफायर देखे जा सकते हैं। यह रोम के खिलाफ बार-कोचबा बगावत ( १३२-१३५ सीई) के दौरान की घटनाओं के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
यरुशलम दिवस :
यह २८वें ईयार को मनाया जाता है, जो शवौत से करीब एक सप्ताह पहले पड़ता है। यह १९६७ में यरुशलम के पुनः एकीकरण के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो करीब १९ सालों तक कंक्रीट की दीवारों और तारों के बाड़ से बंटा रहा। इस दिन इजराइलियों को याद दिलाया जाता है कि यरुशलम यहूदियों के इतिहास, प्राचीन गौरव, आध्यात्मिक सिद्धि और आधुनिक उद्धार का केंद्रबिंदु है। इस दिन कुछ सिनेगॉग में हल्लेल का वाचन होता है।
शवौत :
यहूदी साल की शुरुआत से गणना करें तो यह आखिरी तीर्थ त्योहार पासोवर (६ सिवन) के सात सप्ताह बाद पड़ता है। यह जौ की कटाई के बाद और गेंहू की कटाई के शुरू में पड़ता है। बाइबल (ड्यिूट १६ः१०) में इस अवसर को सप्ताहों का त्योहार (हेब शवौत) बताया गया है। इसकी गणना पासोवर से शुरू होती है और इसे एक ऐसे अवसर के रूप में देखा जाता है, जब नई फसल का अनाज और फल मंदिर के पुजारियों को पेश किया जाता है। धर्मग्रंथ स्रोतों से जुड़ी इसकी एक अतिरिक्त परिभाषा चली आई हैः माउंट सिनाई पर तोरा दिए जाने की वर्षगांठ।
शवौत धर्मपरायण और शास्त्रों के अनुसार चलने वाले लोगों के बीच मनाया जाता है। इस दौरान यरुशलम में लंबे समय तक धार्मिक पाठ होता है और वेस्टर्न वाल पर भारी संख्या में लोग पूजा में शरीक होते हैं। किबुत्जिम (एक खास समुदाय ) में इसे नई फसल की चरम अवस्था और पहले फल के पकने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इनमें फसलों या फलों की वे सात प्रजातियां शामिल हैं, जिनका जिक्र बाइबल में मिलता है : गेहूं, जौ, अंगूर, अंजीर, अनार, जैतून, खजूर। द नाइन्थ ऑफ एव ;जुलाई या अगस्त के आसपासद्ध : यह पहले और दूसरे टेंपल के विध्वंस की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन वियोग या संताप के कई नियम प्रचलन में हैं। पूरे दिन उपवास के अलावा योम किपूर के दौरान प्रचलित आत्मत्याग'' के कई उपायों का भी पालन होता है।
अन्य समारोह
जातीय समुदायों के अपने अतिरिक्त समारोह और विधि-विधान होते हैं। कुछ मशहूर समारोहों में मिमौना'' शामिल है, जो मोरक्को के यहूदियों के लिए खास होता है। पासोवर के एक दिन बाद यह प्रकृति के पुर्ननवीकरण और उसके आशीर्वाद के उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। कुर्द यहूदियों का सहारना'' सुकोत के बाद मनाया जाता है और कुर्दिस्तान के यहूदियों के लिए राष्ट्रीय छुट्टी का दिन होता है। एक अन्य पर्व है सिग्द, जो यूथोपिया के यहूदी समुदाय के लिए छुट्टी का दिन होता है। नवंबर में मनाए जाने वाले इस समारोह की शुरुआत यूथोपिया में जियॉन के लिए कष्ट के इजहार के तौर पर हुई थी और आज इजराइल में उनके आभार के तौर पर जारी है।
इस तरह, अपनी विविध जनसंख्या और बहुरंगी जीवनशैली व नजरिए के साथ इजराइल में यहूदी त्योहारों का चक्र चलता रहता है। ये त्योहार ऐसे लोक रिवाजों से मनाए जाते हैं, जो देश के यहूदीत्व और यहूदी धर्म के केंद्रीय तत्वों को रेखांकित करते हैं।
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