संस्कृति

इजराइल एक ही साथ एक प्राचीन और नया देच्च है। यह आकार में छोटा है, लेकिन सांस्कृतिक रूप से सक्रिय है और इसमें विभिन्न तबकों और समुदायों के लोग रहते हैं। चार हजार साल पुरानी यहूदी धरोहर, एक सदी से भी ज्यादा लंबा यहूदीवाद और आधी सदी से भी अधिक लंबा आधुनिक राष्ट्रवाद -इन सबने मिलकर एक ऐसी संस्कृति को जन्म दिया है जिसकी अपनी पहचान है, मगर इसमें ७० विभिन्न समुदायों की अपनी विशेषताएं भी अक्षुण्ण हैं। इजराइल में दुनिया भर से आए यहूदियों का संगम है, इसमें अनेक सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव समाहित हैं। इसमें परंपरा और नूतनता का अनूठा मेल है; जिसमें इजराइल की अपनी ख़ासियतें हैं तो वैश्विक तत्व भी पिरोए हुए हैं। सांस्कृतिक पहचान की यह खोज निरंतर जारी है। यह दैनिक जीवन में विभिन्न कला रूपों में परिलक्षित भी होता है।

थिएटर एवं मनोरंजन
इजराइल में थिएटर के अनेक तत्व शामिल हैं - समसामयिक और शास्त्रीय; स्वदेशी और आयातित, प्रयोगात्मक और परंपरागत। नाटकों, कलाकारों, निर्देशकों और निर्माताओं की अलग-अलग पृष्ठभूमि है।

इजराइली व्यंजन
भारत - इज़राइल संबंध
धार्मिक और त्योहारी चीजें
जायोनिसम
दूध् और शहद की ध्रती
तेल अवीव
कृषि
मृत सागर
नोबेल पुरस्कार विजेता
पानी प्रोफेसर एवनर एडिन
नाजरथ
किबुत्ज
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विदेशी पष्ठभूमि का स्थानीय परिदृश्य से अनूठा समन्वय हुआ है और क्रमशः इजराइली थिएटर का विकास हुआ है। रंगमंच का माहौल काफी सक्रिय है। अनेक पेशेवर और ग़ैर-पेशेवर थिएटर कंपनियाँ और दर्जनों क्षेत्रीय समूह देश भर की जनता के सामने अपनी कला का जौहर दिखाते रहते हैं। हाल के वर्षों में कई इजराइली थिएटर कंपनियों ने पूर्वी और पश्चिमी यूरोप तथा अमेरिका का दौरा किया है और अंतरराष्ट्रीय महोत्सवों में भाग लिया है।

हल्का-फुल्का मनोरंजन ;लाइट एंटरटेनमेंटद्ध

टेलिविजन और रेडियो यहां लोकप्रिय मनोरंजन के साधन हैं। इसके अलावा गायकों, संगीतकारों, म्यूजिक बैंडों व अन्य समूहों के देश भर में नियमित रूप से कार्यक्रम होते रहते हैं। कुछ गायकों ने स्टार का दर्जा भी हासिल कर लिया है। ऐसे स्टार गायकों में एरिक आईंस्टीन, श्लोमो आर्तजी, मैटी कैस्पी, रिता, डोना इंटरनेशनल, कोरिन एटॉल, हावा एल्बस्टीन, शलोम हनोक और येहुदित रैवित्ज के नाम लिए जा सकते हैं। इसी तरह, टिपेक्स, मशीना, एटराफ, एत्निक्स, फ्रेंड्स ऑफ नताशा, बेट हबुबोत जैसे ग्रुपों ने विदेशों में खासा नाम कमाया है। दुदु फिशर, स्वर्गीय ओत्रता हजा, रैमी क्लिंसटीन, एविन गेफेन, डेविड ब्रोजा और नोआ एहिमनोम निनि ने भी अपनी कला से लोगों का दिल जीता है।

लेस मिजरेजेबल्स' और साउंड ऑफ म्यूजिक' का हिब्रू में भव्य अनुवाद किया गया है और इन्हें काफी प्रशंसा मिली है। इजराइली लोगों में भूमध्य के म्यूजिकल तत्वों की लोकप्रियता बढ़ी है। इसमें अरबी और यूनानी प्रभाव साफ परिलक्षित होता है। बोआज शारावी, येहुदा पोलिकेर, सैरित हदाद, एविहु मेदिना, मार्गलित सनानी, जेहावा बेन और ओफेट लेवी के गीतों में यह असर दिखता है। इसी कड़ी में नए नाम हैं इयाल गोलन, एमिर बेनायून और मिनि मेसिकी। एलि यत्जपैन और ऐडि एश्केनाजी जैसे कॉमिक कलाकारों ने भी खासी लोकप्रियता बटोरी है।

सिनेमा

पिछले पाँच वर्षों में इजराइली सिनेमा ने काफी तरक्की की है। उसने जोसेफ (योस्सी), सेडार की कैम्फायर' (जिसमें यरूशलम के अस्सी के दशक के एक यहूदी परिवार को अपने पिता की मृत्यु के बाद अपने वजूद के लिए संघर्ष करते दिखाया गया है) और ब्रोकन विंग्स' जैसी मशहूर फिल्में बनाई हैं। टर्न लेट एट दी एंड ऑफ दी वर्ल्ड' में ऐसे वीरान शहर को दिखाया गया है जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक समूहों के बीच की दोस्ती की कोशिश चलती है। एविवा, माई लव' को इजराइल, शंघाई और तोक्यो में १० पुरस्कार प्राप्त हुए। ईटन फॉक्स एक अन्य लोकप्रिय निर्देशक हैं। उनकी एक मशहूर फिल्म का नाम है दी बबल' जिसमें अरब-इजराइली संघर्ष की पृष्ठभूमि में तेल अवीव की शहरी जिन्दगी को चित्रित किया गया है। योस्सी एंड जैगर्स' में समलैंगिकों के प्यार को दिखाया गया है।

इजराइली फिल्मों ने २००७ में पहले से कहीं ज्यादा पुरस्कार जीते। निर्देशक ड्रॉर सॉल की फिल्म स्वीट मड' ने सनडांस में शीर्षपुरस्कार हासिल किया। जोसेफ सोडार ने अपनी फिल्म ब्यूफोर्ट' के लिए जिसमें प्रथम लेबनान युद्ध को दिखाया गया है, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का अवार्ड जीता। इस फिल्म को बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में ११ अन्य पुरस्कार भी दिए गए। डेविड कोलाक की फिल्म माई फादर माई लॉर्ड' ने, जिसमें एक दकियानूसी परिवार को छुट्टी मनाते दिखाया गया है, ट्रिवेका में टॉप प्राइज प्राप्त की। इसी तरह, उपन्यासकार एत्गार केरेट और शिरा गेफेन द्वारा निर्देशित फिल्म 'जेलीफिश' को कॉन फिल्म फेस्टिवल में सर्वोत्तम फोटोग्राफी का पुरस्कार दिया गया।

संगीत

फिलस्तीन (इजराइल की भूमि) में यहूदी समुदाय के सांस्कृतिक जीवन में संगीत ने प्रथम विश्व युद्ध के बाद महत्वपूर्ण स्थान लेना शुरू कर दिया था। फिलस्तीन फिलामोनिक ऑर्केस्ट्रा (अब इजराइल फिलामोनिक ऑर्केस्ट्रा) ने १९३६ में तेल अवीव में आर्तुरो तॉस्कैनिनि के नेतृत्व में पहला कंसर्ट पेश किया। इस आर्केस्ट्रा की स्थापना पोलैंड में जन्मे ब्रोनिस्लाव हुबरमैन ने किया था। जल्द ही इसने देश के संगीत-जीवन में प्रमुख स्थान हासिल कर लिया। साल-दर-साल गुजरते हुए इस ऑर्केस्ट्रा ने दुनिया के स्तर पर भी अपना नाम रौशन कर लिया अस्सी के दशक की शुरूआत में, न्यू इजराइल ओपेरा ने ऊँचे पेशेवर स्तर पर प्रोडक्शन शुरू कर दिया। चंद साल पहले प्रथम ओपेरा कंपनी बंद हो गई थी। लेकिन नई ओपेरा कंपनी ने लोगों के बीच फिर से अपनी पैठ बनाई। ओपेरा के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ा।

नब्बे के दशक के प्रारंभिक वर्षों में पूर्व सोवियत संघ से दस लाख से भी ज्+यादा यहूदी इज+राइल में आकर बसे। इससे इजराइल के संगीत-जीवन में बड़ा बदलाव आया। नए आए लोगों में कई पेशेवर संगीतकार, गायक और संगीत शिक्षक थे। उनके आने से नई सिम्फनी और चैम्बर ऑर्केस्ट्रा ने जन्म लिया। कई छोटे-छोटे म्यूजि+क ग्रुप भी बने। इसने स्कूलों, कम्यूनिटी सेंटरों और परंपरावादी संस्थाओं की संगीत विद्या में नई ऊर्जा संचारित की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले स्थानों - रोमन एम्फीथिएटरों और तेल अवीव के मेन ऑडिटोरियम और यरूशलम के इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में गायनऔर सिम्फनी कंसर्ट का आयोजन आए दिन होने लगा। इसके अलावा यरूशलम थिएटर कॉम्प्लैक्स, तेल अवीव के नए परफॉर्मिंग आर्ट सेंटर और इजराइल म्यूजियम तथा शहरों-कस्बों के सांस्कृतिक केन्द्रों में भी संगीत कार्यक्रमों का आयोजन अक्सर होने लगा।

इजराइल में कंसर्ट में जाने वाले लोग बेहद उत्साही होते हैं। वे अच्छे काम की जी भर कर तारीफ़ करते हैं। विश्व प्रसिद्ध संगीतकार पिंचास ज्यूकरमैन, श्लोमो मिंत्ज, डेनियल बरेनबोम और इत्जाक पर्लमैन जैसे कलाकारों ने भी इन उत्साही दर्शेकों की सराहना की है इजराइल में विश्व स्तर के संगीत कार्यक्रमों में इंटरनेशनल हार्प कॉन्टेस्ट और आर्तुर रूबिन्सटीन पियानो कंपीटीशन शामिल हैं। ईन गेव किबुत्ज में आयोजित संगीत उत्सव, क्फार ब्लम किबुत्ज में आयोजित चैम्बर म्यूजिक फेस्टिवल और आइलैट में आयोजित रेड सी जॉज फेस्टिवल में भी दर्शकों की भीड़ उमड़ती है। इजराइल में हर साल वसंत ऋतु में इजराइल फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। इसमें दुनिया भर के कलाकार आते हैं। गीत-संगीत, नृत्य और थिएटर के अद्भुत संगम से यरूशलम तीन हफ्ते तक सराबोर हो जाता है।

मौजूदा संगीत

इजराइल का मौजूदा संगीत परिदृश्य काफी विविधता लिए हुए है। उदाहरण के लिए हिप-हॉप कैंड हैडेग नैहाश राजनीतिक ढोंग को अभिव्यक्त करने के लिए संगीत का इस्तेमाल करता है। उनका एक काफी मशहूर गाना है शिरात हैस्टिकर' (अंग्रेजी में स्टिकर सांग')। इसे इजराइली उपन्यासकार डेविड ग्रॉसमैन के साथ मिल कर लिखा गया है। इजराइल के बम्पर स्टिकरों पर लिखे गए नारों को इस गाने में शामिल किया गया है। परस्पर विरोधी राजनीतिक नारे इजराइली जीवन की हक़ीक़त पर करारा व्यंग्य करते हैं आइडन रीचाल के प्रोजेक्ट में इथियोपियाई संगीत की पृष्ठभूमि और मध्य-पूर्व की रूहानी धुनों का अच्छा समावेश है। टीपैक्स, मैशिना और निसियात हैसचेल जैसे बैंड और एहुद बैनाई, श्लोमो आर्तजि और सैरित हदाद जैसे सफल संगीतकार भी इजराइली संगीत की मुख्यधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने लंबे समय से अपनी लोकप्रियता बरकरार रखी है।

नृत्य

यहूदियों के सामुदायिक और धार्मिक जीवन में प्राचीन काल से ही नृत्य खुशी और गम को अभिव्यक्ति करने के माध्यम रहे हैं। आज यह राष्ट्रीय, धार्मिक, सामुदायिक और पारिवारिक समारोहों और उत्सवों का अभिन्न अंग है। समसामयिक नृत्य का विकास दो दिशाओं में हुआ है -
पहला, लोक नृत्य का विस्तार, जिसे प्राचीन काल में मातृभूमि के निर्माण काल में लोगों ने अपनाया था और दूसरा, आर्ट डांस की स्थापना, जिसका रंगमंचीय स्वरूप था और जिसे पेशेवर नृत्य-निर्देशकऔरनर्तकपेशकरतेरहे। आज दर्जन से भी ज्यादा प्रोफेशनल डांस कंपनियाँ हैं जो देश भर में घूम-घूम कर और विदेशों में जाकर अपने नृत्य कार्यक्रमों से लोगों का मनोरंजन करती हैं। इनमें से ज्यादातर कंपनियों के दफ्तर तेल अवीव में हैं। प्रमुख डांस कंपनियों में दी इजराइल बैले, किबुत्ज कंटेम्पेरेरी डांस कंपनी, दी बैत्शेवा डांस कंपनी, वर्टिगो, इन्बाल पिंटो डांस कंपनी आदि के नाम लिए जा सकते हैं। देश के आधुनिक नृत्य परिदृश्य को छोटे समूह और स्वतंत्र कोरियोग्राफर और भी समृद्ध बनाते हैं। उनके काम को दुनिया भर में नृत्य प्रेमियों से सराहना मिली है। इस विद्या को इजराइल ने जो योगदान दिया है, उसमें मोशे फील्डेनक्राइस की प्रणाली और ऐश्कोल - वाचमैन मूवमेंट नोटेशन सिस्टम शामिल हैं। मोरो प्रणाली को दुनिया भर में सिखाया जाता है। डांस रिकॉर्डिंग करने के मामले में जिन तीन प्रणालियों की विश्व भर में शोहरत है, उनमें से एक वाचमैन सिस्टम है। यह सिस्टम नृत्य और मूवमेंट को लिखित रूप में रिकॉर्ड करता है।

लोक नृत्य

इजराइल के लोक नृत्य में यहूदी और दुनिया भर के गैर-यहूदी लोक नृत्य-रूपों का सम्मिश्रण है। दूसरे मुल्कों में लोक नृत्य जहाँ प्राचीन ग्रामीण परंपराओं को बचाए रखने का जरिया है, वहाँ इजराइल में यह चालीस के दशक से ही सतत विकासमान है - इसमें ऐतिहासिक और आधुनिक स्रोतों तथा समसामयिक नृत्यों का समावेश होता रहा है इसके साथ ही साथ इजराइल में आकर बसे विभिन्न जाति-समूहों के अपने परंपरागत नृत्य हैं। ये जातियाँ इजराइल को विविधता और अनेकता प्रदान करती हैं। इन जातियों के नृत्यों ने भी इजराइल के लोक नृत्य को प्रभावित किया है। कई ऐसे नृत्य समूह हैं जिन्हें यमन, कुर्दिस्तान, उत्तरी अफ्रीका, भारत, जार्जिया, बुखारा, इथियोपिया और अरब क्षेत्र के नृत्यों में महारत हासिल है। ऐसे डांस ग्रुप इन क्षेत्रों के नृत्यों की रचनात्मकता को अक्षुण्ण रखते हैं।

साहित्य

नोबेल पुरस्कार विजेता योसफ हैम बर्नर (१८८१-१९२१) और शैमुएल योसफ एंगन (१८८८-१९७०) को कई लोग आधुनिक हिब्रू साहित्य का जनक मानते हैं। देश में जन्मे लेखकों ने चालीस और पचास के दशकों में अपनी रचनाएँ प्रकाशित करनी शुरू कीं। उन्हें ÷स्वतंत्र पीढ़ी का युद्ध' कहकर संबोधित किया जाता है। पहले की साहित्यिक पीढ़ी से अलग हट कर उन्होंने अपनी रचनाओं में नए मिजाज और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को कलमबद्ध किया। इसकी वजह यह थी कि उनकी मातृभाच्चा हिब्रू थी और उनके अनुभव खालिस इजराइली धरती से जुड़े हुए थे।

साठ के दशक में हिब्रू भाषा के गद्यकारों में एक नई पीढ़ी ने दस्तक दी। इनमें ए.बी. येहोशुवा, एमॉस, योरम कानिक और याकोब शैब्ताई के नाम लिए जा सकते हैं। ये काफी प्रभावशाली लेखक थे। इन्होंने वैचारिक प्रणालियों से अलग हटकर आदमी की निजी दुनिया पर अपने लेखन को केंद्रित किया।

अस्सी और नब्बे के दशक में साहित्यिक गतिविधियों ने काफी जोर पकड़ा। इस दौर में प्रकाशित होने वाली पुस्तकों की तादाद में खासी बढ़ोतरी हुई। साथ ही, कई इजराइली लेखकों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली। ऐसे साहित्यकारों में ओज, योहोशुवा, कानिक, एहरॉन एपलफील्ड, डेविड शहार, डेविड ग्रॉसमैन और मीर शालेव के नाम प्रमुख रूप से लिए जा सकते हैं। इस दौर में यह माना जाने लगा कि आदमी को अपना व्यक्तित्व और अपने परिवेश को समझने में साहित्य एक उम्दा साधन है। इनमें से कई लेखकों ने मौजूदा इजराइली लोगों की राजनीतिक और नैतिक दुविधाओं को भी उजागर किया। इस श्रेणी में ओज, ग्रॉसमैन और शालेन के नाम लिए जा सकते हैं।

इसके पहले अनछुए विषयों पर भी कलम चलाई गई, जिसमें अरब गाँव का परिदृश्य भी शामिल है। अरब-ईसाई लेखक एंटन शमास और इजराइली-अरबी पत्रकार व लेखक सैयद काशुआ की रचनाओं में इसकी छाप दिखती है। अति रूढ़िवादी यहूदियों, जो खुद को आधुनिक समाज से एकदम जुदा रखते हैं, पर भी लेखनी चली। इस श्रेणी में योस्सि बर्सटीन की रचना को रखा जा सकता है। हेम बेर ने यरूशलम की अदालतों की जिन्दगी को अपनी रचना का विषय बनाया। यित्हाक ओर्पाज ऑर्बेक ने ऐसे दौर में नास्तिकों के वजूद को स्थापित किया, जब धर्म-निरपेक्ष मूल्य बिखर रहे हैं और कट्टरपंथी उभार मजबूत हो रहा है। कुछ लेखकों ने घुमंतू जातियों के एकाकीपन को भी अपना विषय बनाया। आमी माइकल, अल्बर्ट सुइसा, डैन बेनाया सेरि जैसे लेखकों ने अरब देशों से आकर इजराइल में आकर बसे लोगों की जद्दोजहद पर अपनी लेखनी चलाई। कुछ अन्य लेखकों ने लोकतंत्र और मानवाधिकार जैसे सार्वभौमिक विषयों को चुना। इस कोटि में यित्हाक बेन-नेर, कानिक, ग्रॉसमैन, ओज के नाम प्रमुख रूप से लिए जा सकते हैं।

कई उल्लेखनीय महिला लेखिकाएँ भी सामने आईं। उन्होंने न सिर्फ सामान्य विषयों पर लिखा बल्कि यहूदी परंपरा में महिलाओं के स्थान और यहूदी उद्यम में महिलाओं की भूमिका का भी आकलन किया। एमालिया कहाना-कार्मोन, चैना बैत-शहार, शुलामित हरेवेन, शुलामित लैपिड, रूथ एल्मॉग, सेवियन लिब्रेक्त और बात्या गुर के नाम ऐसी लेखिकाओं में शुमार किए जाते हैं। लैपिड और गुर ने तो डिटेक्टिव फिक्शन की दुनिया में भी बखूबी कदम रखा और उन्हें भरपूर सराहना मिली - देश में भी और विदेश में भी उनकी कई रचनाओं के विदेशों में अनुवाद प्रकाशित किए गए।

हाल में लेखकों की एक युवा पीढ़ी उभर कर आई है। यह पीढ़ी इजराइल की मुख्यधारा के अनुभवों को नकारती है। उनका जोर एकाकी, अंतर्मुखी और अपनी ही दुनिया में डूबे व्यक्तित्वों पर रहता है। येहूदित कात्जिर, एत्गार केरेट, ऑर्ली कैस्टेल ब्लम, गैडी तॉब, आइरिट लाइनोर, मिरा मैगेन जैसे साहित्यकारों के नाम इस श्रेणी में लिए जा सकते हैं। इन लेखकों के जबरदस्त फैन हैं। उनकी रचनाएँ बेस्ट सेलर होने की गारंटी होती हैं। हाल के वर्षों में, केरेट ने यूरोप के पाठकों के बीच बेहद शोहरत पाई है। उनकी कई लघु कहानियाँ यूरोपीय बाजार में हिट रही हैं। इनमें मिसिंग किसिंगर' का उल्लेख किया जा सकता है, जिसे प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार भी हासिल हुआ।

 
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