प्रिय मित्रों,

इजराइल की स्थापना के ६० साल पूरे होने पर हिंदी में यह अनूठा प्रकाशन प्रस्तुत करना वास्तव में मेरे लिए सम्मान और विशेषाधिकार की बात है। हम दोनों देशों और लोगों के बीच की गहरी दोस्ती अब एक मिसाल बन चुकी है। यह दोस्ती दोनों प्राचीन सभ्यताओं की उपलब्धियों के समस्त आयामों को समाहित करती है, जो व्यापार, संस्कृति, कृषि, विज्ञान, शिक्षा और कई अन्य क्षेत्रों से जुड़े हैं।

भारत और इजराइल विश्व समुदाय के सामने धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता व सहिष्णुता का उदाहरण पेश करते हैं।

शुभ इच्छाओं के साथ
नमस्ते
महामहिम मार्क सोफेर
इजराइल के राजदूत

और
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इस्राइल एक ही साथ एक प्राचीन और नया देष है। यह आकार में छोटा है, लेकिन सांस्कृतिक रूप से सक्रिय है और इसमें विभिन्न तबकों और समुदायों के लोग रहते हैं। चार हज़ार साल पुरानी यहूदी धरोहर, एक सदी से भी ज़्यादा लंबा यहूदीवाद और आधी सदी से भी अधिक लंबा आधुनिक राष्ट्रवाद इन सबने मिलकर एक ऐसी संस्कृति को जन्म दिया है जिसकी अपनी पहचान है, मगर इसमें 70 विभिन्न समुदायों की अपनी विशेषताएं भी अक्षुण्ण हैं। इस्राइल में दुनिया भर से आए यहूदियों का संगम है, इसमें अनेक सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव समाहित हैं। इसमें परंपरा और नूतनता का अनूठा मेल है; जिसमें इस्राइल की अपनी ख़ासियतें हैं तो वैश्विक तत्व भी पिरोए हुए हैं। सांस्कृतिक पहचान की यह खोज निरंतर जारी है। यह दैनिक जीवन में विभिन्न कला रूपों में परिलक्षित भी होता है।
उच्च तकनीक के आविष्कार के मामले में इज़राइल को एक अग्रणी देश माना जाता है। इसका आधार है सुदृढ़ आधारभूत ढांचा और शिक्षित एवं कल्पनाशील श्रम। इज़राइली अर्थ–व्यवस्था का निरंतर विकास हो रहा है। सन् 2004 में उसकी विकास–दर 4.3 फीसदी थी जो 2005 में बढ़ कर 5.2 फीसदी हो गई। इस क्रम के जारी रहने की उम्मीद है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि इज़राइल की तकनीकी विशेषज्ञता की अन्र्तराष्ट्रीय बाजार मे मांग बढ़ती जा रही है। सन् 2005 में इज़राइल के कुल औद्योगिक निर्यात में से 45 फीसदी हिस्सा उच्च–तकनीक के निर्यात का ही था।

भारत और इजराइल के व्यापारिक संबंध हर क्षेत्र में फल-फूल रहे हैं। इनके द्विपक्षीय नागरिक व्यापार में साल २००६ में खासी बढ़ोतरी हुई है। यह पिछले दशक के २०० मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़ कर २ ७ बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों देशों ने अगले पांच सालों में अपने इस व्यापार को पांच बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

होलोकॉस्ट क्या था ?
होलोकॉस्ट समूचे यहूदी लोगों को जड़ से खत्म कर देने का सोचा-समझा और योजनाबद्ध प्रयास था।
१९३३ में अडोल्फ हिटलर जर्मनी की सत्ता में आया और उसने एक नस्लवादी साम्राज्य की स्थापना की, जिसमें यहूदियों को सब-ह्यूमन करार दिया गया और उन्हें इंसानी नस्ल का हिस्सा नहीं माना गया। १९३९ में जर्मनी द्वारा विश्व युद्ध भड़काने के बाद हिटलर ने यहूदियों को जड़ से मिटाने के लिए अपने अंतिम हल (फाइनल सोल्यूशन) को अमल में लाना शुरू किया। उसके सैनिक यहूदियों को कुछ खास इलाकों में ठूंसने लगे। उनसे काम करवाने, उन्हेंएक जगह इकट्ठा करने और मार डालने के लिए विशेष कैंप स्थापित किए गए, जिनमें सबसे कुख्यात था ऑस्चविट्ज। यहूदियों को इन शिविरों में लाया जाता और वहां बंद कमरों में जहरीली गैस छोड़कर उन्हें मार डाला जाता।

 
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